और ये खुशी - हिन्दी में लिखने की!

एक वक़्त था, जब दिल को पन्नो पे और पन्नो से दिलों में उतरने का शौक हुआ करता था...
परसों रात की पार्टी, और महसूस हुआ, वो ख़ालीपन, वो बेबाकपन अब चला गया है कहीं रोज़ की भागा-दौड़ी में..
शब्द ही नहीं होते किसी से बातें करने क लिए..बताने क लिए वो सारी बातें छुपी हुई अंदर...

आज, मन हुआ कुछ .खुद से बातें करने का..
और ये खुशी - हिन्दी में लिखने की!

कुछ दिन पहले जब वाइरलथा, तब मालूम हुआ उस छुपे हुए मन का, जो ढूंढता है बहुत कुछ..
अलमारी में मिली कब से रखी हुई दवाइयाँ...जैसे ख़ज़ाना हाथ लगा हो कोई
प्यार ही तो है अनकंडीशनलवाला..घर का..सब से अलग..सब से अच्छा..
सालों महीनो खोया सा कहीं और एक दिन दबे पाओं चुपके से समेत लेता है अपने में...

डॉक्टर के जाना एक अलग ही मुसीबत है यहाँ. मीठी गोलियाँ जो नहीं देते..और ना ही वक्त

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